राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा संचालित भर्ती प्रक्रियाओं में साक्षात्कार (Interview) एक निर्णायक एवं अत्यंत संवेदनशील चरण होता है, जहाँ अभ्यर्थी की योग्यता, व्यक्तित्व एवं निर्णय क्षमता का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जाता है। इस संदर्भ में यह समझना आवश्यक है कि स्वयं अभ्यर्थी RPSC की साक्षात्कार प्रक्रिया को किस दृष्टि से देखते हैं। CAP Rajasthan के द्वारा RPSC पर किए गए सर्वे का यह भाग प्रश्न (Q4) – क्या आपको लगता है कि RPSC की साक्षात्कार (Interview) प्रक्रिया निष्पक्ष (Fair) है? – के संबध में 1,008 अभ्यर्थियों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
प्रतिक्रिया वितरण (Data Profile)
| प्रतिक्रिया श्रेणी (Category) | प्रतिक्रियाएँ (Responses) | प्रतिशत (%) |
|---|---|---|
| बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है (Not Transparent at All) | 254 | 25.2% |
| ज़्यादातर अपारदर्शी (Mostly Opaque) | 219 | 21.7% |
| आंशिक रूप से अपारदर्शी (Partially Opaque) | 219 | 21.7% |
| अधिकतर पारदर्शी, कुछ कमियाँ (Mostly Transparent with Minor Flaws) | 198 | 19.7% |
| पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह (Fully Transparent & Accountable) | 118 | 11.7% |

समग्र प्रतिक्रिया पैटर्न (Aggregate Response Pattern)
आरपीएससी की साक्षात्कार प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की राय में एक “नकारात्मक बहुमत” (Negative Majority) दिखाई देता है। डेटा को चार प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया जा सकता है:
A. पूर्ण अविश्वास (Extreme Distrust):
- 25.2% (254 प्रतिक्रियाएँ) अभ्यर्थियों का मानना है कि प्रक्रिया “बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है”। यह दर्शाता है कि हर चार में से एक छात्र सिस्टम को पूरी तरह भ्रष्ट मानता है।
B. प्रणालीगत संदेह (Systemic Skepticism):
- 21.7% (219 प्रतिक्रियाएँ) अभ्यर्थी इसे “ज्यादातर अपारदर्शी” मानते हैं, जो चयन के अंतिम दौर में बाहरी हस्तक्षेप का संकेत देते हैं।
C. सुधार की गुंजाइश (Scope for Reform):
- 21.7% (219 प्रतिक्रियाएँ) अभ्यर्थी इसे “आंशिक रूप से अपारदर्शी” मानते हैं। यह वर्ग मानता है कि ढांचा तो है, लेकिन क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी है।
D. पूर्ण विश्वास (Fully Trust):
- केवल 11.7% (118 प्रतिक्रियाएँ) अभ्यर्थी ही इसे “पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह” मानते हैं।
निष्कर्षतः
- लगभग 69% (692/1008) अभ्यर्थियों को RPSC साक्षात्कार की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। यह ट्रस्ट गैप वर्तमान में आयोग के सामने सबसे बड़ी संरचनात्मक चुनौती को दर्शाता है।
तुलनात्मक विश्लेषण (Cross-Tab Analysis)
1. लिंग आधारित प्रभाव (Gender-wise Influence)

डेटा यह स्पष्ट करता है कि पुरुष अभ्यर्थियों में व्यवस्था के प्रति “सिस्टमैटिक अविश्वास” महिलाओं की तुलना में अधिक है।
- पुरुष (Male – कुल 707):
- बिल्कुल पारदर्शी नहीं: 203 अभ्यर्थी (28.7%)
- पूर्ण पारदर्शी: मात्र 74 अभ्यर्थी (10.5%)
- महिला (Female – कुल 301):
- बिल्कुल पारदर्शी नहीं: 51 अभ्यर्थी (16.9%)
- पूर्ण पारदर्शी: 44 अभ्यर्थी (14.6%)
व्याख्या:
- पुरुष अभ्यर्थी साक्षात्कार के अंकों को लेकर अधिक असुरक्षित महसूस करते हैं, जबकि महिलाओं में तुलनात्मक रूप से विश्वास का स्तर थोड़ाबेहतर है।
2. परीक्षा–श्रेणी परिप्रेक्ष्य (Exam-Category Perspective)
विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के नजरिए में भी अंतर है। (नोट: एक अभ्यर्थी एक से अधिक परीक्षा की तैयारी कर सकता है):
आरएएस (RAS) तैयारी करने वाले (383):
- इस समूह के 23% लोग साक्षात्कार को “बिल्कुल अपारदर्शी” मानते हैं। संभवतः यहाँ उच्च पदों के कारण”डिस्क्रीशनरी पावर” का डर अधिक है।
शिक्षक/लेक्चरर तैयारी करने वाले (597):
- इस समूह में 26% से अधिक लोगों ने अविश्वास जताया है। यह संभवतः लंबे समय तक चलने वाले साक्षात्कारऔर परिणामों की देरी के कारण है।
3. परीक्षा तैयारी–वार विश्लेषण (Preparation Mode Analysis)
तैयारी का स्रोत (mode of Preparation) भी नजरिए को प्रभावित करता है:
- कोचिंग संस्थान (Coaching – 115 प्रतिक्रियाएँ):
- बिल्कुल पारदर्शी नहीं: 30 अभ्यर्थी (26.1%)
- पूर्ण पारदर्शी: 17 अभ्यर्थी (14.8%)
- स्व-अध्ययन (Self-Study – 893 प्रतिक्रियाएँ):
- बिल्कुल पारदर्शी नहीं: 224 अभ्यर्थी (25.1%)
- पूर्ण पारदर्शी: 101 अभ्यर्थी (11.3%)
व्याख्या:
- कोचिंग जाने वाले छात्र ‘पूर्ण पारदर्शी’ कहने में थोड़े आगे हैं, लेकिन ‘बिल्कुल पारदर्शी नहीं’ के आंकड़े में दोनों समूह लगभग बराबर (25-26%) हैं। यह साबित करता है कि अविश्वास की भावना “यूनिवर्सल” है।
समेकित विश्लेषण (Integrated Analysis)
1. लिखित बनाम साक्षात्कार चरण
अभ्यर्थी लिखित परीक्षा को अपेक्षाकृत मानकीकृत (Standardized) और मापनयोग्य (Quantifiable) प्रक्रिया के रूप में देखते हैं, जबकि साक्षात्कार चरण को पारदर्शिता की दृष्टि से एक मुख्य विफल बिंदु (Point of Failure) माना जा रहा है।
डेटा:
- सामान्य परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न (Q3: आपकी नज़र में RPSC की परीक्षा प्रक्रिया—जैसे प्रश्नपत्र निर्माण, मूल्यांकन एवं परिणाम—कितनी पारदर्शी हैं?) में केवल 11.5% (116) अभ्यर्थियों ने “बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं” विकल्प चुना।
- वहीं, साक्षात्कार (Q4) के संदर्भ में यह अनुपात बढ़कर 25.2% (254) हो गया।
व्याख्या:
- लिखित परीक्षा की तुलना में 2.1 गुना अधिक अभ्यर्थी साक्षात्कार प्रक्रिया को पूर्णतः अपारदर्शी मानते हैं। यह संकेत देता है कि इस चरण में बाहरी प्रभाव, पक्षपात और गैर-मेधा (Non-merit) तत्वों की आशंका अधिक प्रबल है।
2. मानसिक स्वास्थ्य का पूर्वानुमानक
निष्पक्षता की धारणा केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अभ्यर्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण कारक है।
डेटा:
- “बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं” मानने वाले अभ्यर्थियों में से 70% (178/254) ने तनाव एवं चिंता (Stress & Anxiety) की सूचना दी।
- इसके विपरीत, परीक्षा प्रक्रिया को “पूरी तरह पारदर्शी” मानने वाले अभ्यर्थियों में तनाव का स्तर केवल 45.7% (54/118) रहा।
व्याख्या:
- अविश्वास रखने वाले अभ्यर्थियों में तनाव की संभावना, भरोसा रखने वालों की तुलना में लगभग 3.3 गुना अधिक पाई गई। यह दर्शाता है कि कथित अन्याय मानसिक संकट और निराशा का एक प्रमुख कारक बनता जा रहा है, जिससे यह विषय धीरे-धीरे सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या (Public Health Issue) का रूप ले रहा है।
3. एग्ज़िट ट्रिगर (Brain Drain)
अविश्वास की भावना सीधे तौर पर करियर शिफ्टिंग और प्रणाली से बाहर निकलने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है।
डेटा:
- अविश्वासी समूह के अभ्यर्थी, भरोसा रखने वाले समूह की तुलना में लगभग चार गुना अधिक संभावना से केंद्रीय परीक्षाओं की ओर रुख कर रहे हैं।
- अविश्वासी समूह में 19 अभ्यर्थी पहले ही शिफ्ट कर चुके हैं, जबकि भरोसा रखने वाले समूह में यह संख्या केवल 5 है।
व्याख्या:
- यह प्रवृत्ति प्रतिभा पलायन (Brain Drain) को जन्म दे रही है। उच्च विश्लेषण क्षमता और प्रतिस्पर्धी योग्यता वाले अभ्यर्थी राज्य सेवाओं से हटकर ऐसे मंचों की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ उन्हें समान अवसर और अधिक पारदर्शिता दिखाई देती है। दीर्घकाल में यह राज्य प्रशासन के लिए मानव संसाधन क्षरण का गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है।
4. सार्वभौमिक संदेह (कोचिंग बनाम स्वाध्याय)
अविश्वास की भावना केवल कोचिंग संस्थानों से जुड़ी अफवाहों का परिणाम नहीं है।
डेटा:
- कोचिंग लेने वाले अभ्यर्थी: 26.1% ने “बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं” कहा।
- स्वाध्याय करने वाले अभ्यर्थी: 25.1% ने यही राय व्यक्त की।
व्याख्या:
- दोनों समूहों में लगभग समान प्रतिशत यह स्पष्ट करता है कि अभ्यर्थियों का अविश्वास व्यक्तिगत पृष्ठभूमि-आधारित नहीं, बल्कि प्रणालीगत (Systemic) है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि परीक्षा संचालन संस्था की सार्वजनिक छवि सभी वर्गों में संदेह के दायरे में है।




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