CAP Rajasthan

Survey -02: RPSC परिणाम जारी करने की प्रक्रिया की गति और निष्पक्षता पर अभ्यर्थियों की राय

CAP Rajasthan ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता और निष्पक्षता का मूल्यांकन करने के लिए एक सर्वेक्षण आयोजित किया। इस सर्वे में प्रतिभागियों से परीक्षा प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न पूछे गए, जिनका उद्देश्य संस्था की विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों के अनुभवों को समझना था।

विशेष रूप से, RPSC द्वारा परिणाम जारी करने की गति (Speed) और उसकी निष्पक्षता (Fairness) ऐसे विषय हैं जो पूरी चयन प्रक्रिया की शुचिता पर गहरा प्रभाव डालते हैं। सर्वेक्षण का प्रश्न संख्या–6 इन्हीं महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, ताकि आयोग की कार्यप्रणाली के प्रति अभ्यर्थियों के विश्वास और उनकी धारणा का सटीक विश्लेषण किया जा सके।

प्रश्न का वैचारिक विवेचन (Conceptual Background)

“RPSC के परिणाम जारी करने की प्रक्रिया को आप गति (Speed) और निष्पक्षता (Fairness) के हिसाब से कैसे देखते हैं?

अभ्यर्थियों को निम्नलिखित विकल्प दिए गए थे:

  1. परिणाम समय पर आते हैं और पूरी तरह निष्पक्ष हैं
  2. परिणाम निष्पक्ष होते हैं, पर देर से आते हैं
  3. परिणाम समय पर आते हैं, पर निष्पक्षता पर सवाल हैं
  4. परिणाम देर से आते हैं और पारदर्शिता की कमी रहती है
  5. निश्चित नहीं हूँ / कोई राय नहीं

डेटा प्रोफाइल एवं वर्णनात्मक विश्लेषण

सर्वे में कुल 1008 उत्तरदाताओं ने भाग लिया। प्रश्न संख्या–6 के उत्तर पाँच विकल्पों में वितरित थे। उनकी संख्या और प्रतिशत नीचे तालिका के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

विकल्पसंख्या (Number of Responses)प्रतिशत (%)
परिणाम समय पर आते हैं और पूरी तरह निष्पक्ष हैं939.23
परिणाम निष्पक्ष होते हैं, पर देर से आते हैं19519.35
परिणाम समय पर आते हैं, पर निष्पक्षता पर सवाल हैं14814.68
परिणाम देर से आते हैं और पारदर्शिता की कमी रहती है49248.81
निश्चित नहीं हूँ / कोई राय नहीं737.24
कुल (Grand Total)1008100

ऊपर दी गई तालिका से स्पष्ट होता है कि लगभग 48.8% अभ्यर्थियों का मानना है कि परिणामों में न केवल देरी होती है, बल्कि उनमें पारदर्शिता की भी भारी कमी रहती है। इसके विपरीत, केवल 9.23% अभ्यर्थी ही ऐसे हैं जो परिणामों की गति और निष्पक्षता दोनों से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

Pie chart displaying survey results regarding perceptions of speed and fairness in the RPSC result announcement process, with labeled segments representing different opinions.
Chart – 01

2. परीक्षा-श्रेणी आधारित विश्लेषण (Category of Examination)

अभ्यर्थी जिस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उसके आधार पर उनकी राय में महत्वपूर्ण अंतर देखा गया है:

A. आरएएस (RAS) अभ्यर्थी

व्याख्या:

इस वर्ग में आयोग के प्रति सबसे गहरा अविश्वास देखने को मिलता है। कुल 104 अभ्यर्थियों में से 61.5% (64 अभ्यर्थी) ने माना कि परिणाम देर से आते हैं और पारदर्शिता का अभाव है। केवल 9.6% अभ्यर्थी ही पूरी तरह संतुष्ट पाए गए।

Bar chart titled 'RAS' showing responses with varying values: 4, 64, 15, 10, and 11, with the highest bar representing 64.
Chart – 02

B. कॉलेज लेक्चरर / शिक्षक अभ्यर्थी

व्याख्या:

यह सबसे बड़ा उत्तरदाता समूह (250 अभ्यर्थी) है। इनमें से लगभग आधे (122 अभ्यर्थी या 48.8%) पारदर्शिता और गति—दोनों से असंतुष्ट हैं। हालाँकि, 19.6% का मानना है कि प्रक्रिया धीमी है, पर निष्पक्ष है।

Bar chart displaying various categories related to college teachers, including performance metrics and observed results, with values ranging from 2 to 122.
Chart – 03

C. स्कूल शिक्षक अभ्यर्थी

व्याख्या:

कुल 179 उत्तरदाताओं में से 34.6% ने परिणामों में देरी और पारदर्शिता की कमी की बात कही। इस वर्ग में “परिणाम निष्पक्ष हैं, पर देर से आते हैं”कहने वालों का प्रतिशत अन्य श्रेणियों की तुलना में अधिक (25.7%) है, जो प्रक्रिया की शुचिता पर कुछ हद तक विश्वास को दर्शाता है।

Bar graph showing educational outcomes based on various criteria, with categories labeled in Hindi. The highest bar represents 62, indicating a significant point of data.
Chart – 04

D. राजस्थान SI (सब-इंस्पेक्टर) अभ्यर्थी

व्याख्या:

इस छोटी श्रेणी (34 अभ्यर्थी) में राय अपेक्षाकृत संतुलित है। 29.4% अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता की कमी महसूस की, जबकि 23.5% ने परिणामों को समय पर और पूरी तरह निष्पक्ष मानते हुए संतुष्टि व्यक्त की।

Bar chart comparing various performance metrics for Rajasthan SI (Sub-Inspector)/Platoon Commander, including results and time taken.
Chart – 05

E. संयुक्त तैयारी वाले अभ्यर्थी (RAS + कॉलेज लेक्चरर + शिक्षक)

व्याख्या:

जो अभ्यर्थी एक साथ कई उच्च-स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं (92 अभ्यर्थी), उनमें से 63% ने व्यवस्था को पारदर्शी नहीं माना। इस वर्ग में पूर्ण संतुष्टि का स्तर सबसे कम (केवल 2.1%) पाया गया।

Bar chart showing results of RAS college lecture survey with categories: 'Not certain / No opinion', 'Results come late and are unclear', 'Results are satisfactory', 'Results are timely but fully clear', and 'Results are timely but with questions'.
Chart – 06

प्रमुख निष्कर्ष (Key Findings)

  • प्रणालीगत देरी: लगभग 68% (48.8% + 19.3%) अभ्यर्थियों ने परिणामों के आने में देरी की बात स्वीकार की है, जो दर्शाता है कि समयबद्धता आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है।
  • पारदर्शिता का अभाव: सबसे बड़ा समूह (48.8%) परिणामों की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी महसूस करता है, जो संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
  • मिश्रित संतोष: केवल 19.3% अभ्यर्थियों को निष्पक्षता पर भरोसा है, लेकिन वे भी देरी से परेशान हैं, जबकि 14.6% समय पर परिणाम मिलने के बावजूद निष्पक्षता को लेकर आशंकित हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण (Cross-Tab Analysis)

लिंग के आधार पर विश्लेषण करने पर प्राप्त आँकड़ों का विवरण निम्न है:

Bar chart depicting opinions based on gender, comparing responses from men and women.
Chart – 07
  • पुरुष अभ्यर्थियों का दृष्टिकोण:707 पुरुष उत्तरदाताओं में से 52.05% (368) परिणामों में देरी और पारदर्शिता की कमी को सबसे बड़ी समस्या मानते हैं।
  • महिला अभ्यर्थियों का दृष्टिकोण:301 महिला उत्तरदाताओं में से 41.19% (124) पारदर्शिता की कमी और देरी से असंतुष्ट हैं। हालाँकि, महिलाओं में “निश्चित नहीं” (9.96%)का प्रतिशत पुरुषों (6.08%) की तुलना में थोड़ा अधिक है।
  • निष्पक्षता पर विश्वास:केवल 8.91% पुरुष और 9.96% महिला अभ्यर्थी ही प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और समयबद्ध मानते हैं।

व्याख्या एवं निहितार्थ (Interpretation & Implications)

  • सर्वेक्षण के तटस्थ विश्लेषण से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की कार्यप्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों की राय काफी विभाजित है। जहाँ एक ओर भारी बहुमत, यानी लगभग 48.81% अभ्यर्थी, वर्तमान चयन प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता दोनों की कमी महसूस करते हैं, वहीं 19.35% का मानना है कि प्रक्रिया निष्पक्ष तो है, पर इसकी गति अत्यंत धीमी है। मात्र 9.23% उत्तरदाता ही ऐसे पाए गए जो प्रणाली की समयबद्धता और निष्पक्षता से पूरी तरह संतुष्ट हैं।
  • लिंग और परीक्षा-श्रेणी के आधार पर विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि पुरुष अभ्यर्थियों में असंतोष का स्तर (52%) महिलाओं (41%) की तुलना में अधिक है, जबकि आरएएस (RAS) जैसी उच्च-स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों में अविश्वास का स्तर सबसे अधिक (61.5%) पाया गया है।
  • अंततः यह डेटा इंगित करता है कि हालाँकि आयोग की निष्पक्षता पर एक वर्ग का भरोसा बना हुआ है, लेकिन परिणामों में अत्यधिक देरी सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए एक सार्वभौमिक और गंभीर चिंता का विषय है।

प्रमुख सुझाव (Key Suggestions)

सर्वेक्षण के परिणामों को ध्यान में रखते हुए, व्यवस्था में सुधार हेतु निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत किए जाते हैं:

  1. निश्चित परीक्षा कैलेंडर:आयोग को परीक्षा से लेकर परिणाम जारी करने तक की एक स्पष्ट समय-सीमा (Timeline) घोषित करनी चाहिए, जिससे 68% अभ्यर्थियोंकी देरी संबंधी चिंता का समाधान हो सके।
  2. पारदर्शिता में वृद्धि:उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, अंकों के वितरण और कट-ऑफ निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक सार्वजनिक और स्पष्ट बनाया जाना चाहिए, ताकि 48.81% अभ्यर्थियों का संदेह दूर हो सके।
  3. डिजिटल सुधार:परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर मानवीय हस्तक्षेप कम किया जाना चाहिए, जिससे गति और सटीकता दोनों में सुधार हो।
  4. नियमित संवाद:आयोग और अभ्यर्थियों के बीच एक प्रभावी संचार व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे अफवाहों पर रोक लगे और पारदर्शिता के प्रति विश्वास बहाल हो।
  5. शिकायत निवारण तंत्र:परिणामों और चयन प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों के लिए एक त्वरित और निष्पक्ष निवारण तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।

नोट: ये सुझाव अभ्यर्थियों के फीडबैक और डेटा पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य आयोग की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है।ये सभी आँकड़े CAP Rajasthan द्वारा स्वतंत्र रूप से कराए गए सर्वेक्षण से प्राप्त किए गए हैं।

Author

  • Ramnaresh is from Rajasthan and recently completed his Master’s in Survey Research and Data Analytics from the International Institute for Population Sciences (IIPS), Mumbai.

    He is interested in population trends, social research, and using data to support public policy. He also enjoys working with statistics and data visuals to better understand social issues.


     

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