सर्वे का परिचय
CAP राजस्थान द्वारा आयोजित सर्वे के प्रश्न संख्या–2 के अंतर्गत अभ्यर्थियों से RPSC के सिलेबस (पाठ्यक्रम) की डिजाइन, प्रासंगिकता, संरचना और परीक्षा-उन्मुखता को लेकर उनकी राय प्राप्त की गई। इस प्रश्न के अंतर्गत अभ्यर्थियों को चार विकल्प प्रदान किए गए थे।
यह प्रश्न इस उद्देश्य से शामिल किया गया था कि यह समझा जा सके कि अभ्यर्थी RPSC के सिलेबस को कितना उपयोगी, प्रासंगिक और आधुनिक मानते हैं।
प्रस्तुत रिपोर्ट में सर्वेक्षण से प्राप्त डाटा के आधार पर प्रतिशतगत वितरण, लिंग-आधारित तुलना, विश्लेषण, निष्कर्ष तथा सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।
प्रश्न संख्या–2. आप RPSC के सिलेबस (पाठ्यक्रम) के डिजाइन को कैसे देखते हैं?
अभ्यर्थियों को निम्नलिखित विकल्प दिए गए थे:
- निश्चित नहीं हूँ
- प्रत्येक परीक्षा के अनुसार बहुत अच्छा और केंद्रित होता है
- कुछ हद तक परीक्षा-उन्मुख होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अधिकांश परीक्षाओं के लिए समान रहता है
- पुराना है और परीक्षा की आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता
डेटा प्रोफाइल तथा वर्णनात्मक विश्लेषण
इस सर्वेक्षण में कुल 1008 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। प्रश्न संख्या–2 के अंतर्गत दिए गए चार विकल्पों पर अभ्यर्थियों की प्रतिक्रियाएँ तथा उनका प्रतिशतगत वितरण नीचे तालिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
| राय | प्रतिक्रियाएँ | प्रतिशत |
|---|---|---|
| प्रत्येक परीक्षा के अनुसार बहुत अच्छा और केंद्रित होता है | 274 | 27.18% |
| कुछ हद तक परीक्षा-उन्मुख होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अधिकांश परीक्षाओं के लिए समान रहता है | 443 | 43.94% |
| पुराना है और परीक्षा की आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता | 218 | 21.62% |
| निश्चित नहीं हूँ | 73 | 7.24% |
- आयोजित सर्वे से स्पष्ट होता है कि केवल 27.18% अभ्यर्थी ही RPSC के सिलेबस को अच्छा और परीक्षा के अनुसार केंद्रित मानते हैं। इसके विपरीत, 21.62% अभ्यर्थियों का मानना है कि सिलेबस परीक्षा की वास्तविक आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता।
- सर्वे में भाग लेने वाले 43.94% अभ्यर्थियों ने यह राय व्यक्त की कि सिलेबस का एक बड़ा हिस्सा सभी परीक्षाओं के लिए लगभग समान रहता है, जिससे वह प्रत्येक परीक्षा की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरी तरह संबोधित नहीं कर पाता।
- इसके अतिरिक्त, 7.24% अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जो इस विषय पर कोई निश्चित राय नहीं बना पाए, जो यह दर्शाता है कि सिलेबस की संरचना और उद्देश्य को लेकर कुछ स्तर तक अस्पष्टता भी बनी हुई है।

विश्लेषण
सकारात्मक राय
- कुल 27.18% लोग (विकल्प 1) सिलेबस को परीक्षा केंद्रित मानते हैं।यह इस ओर संकेत करता है कि वर्तमान सिलेबस संरचना को केवल लगभग 1/4 अभ्यर्थी ही सही मानते हैं और इसे यथारूप बनाए रखना चाहते हैं।
नकारात्मक राय
- वहीं 65.56% लोग (विकल्प 2 एवं 3) सिलेबस को पुराना, आवश्यकता के अनुसार नहीं, और विभिन्न परीक्षाओं के लिए लगभग समानमानते हैं।
यह दर्शाता है कि सर्वे में भाग लेने वाले बहुमत अभ्यर्थी सिलेबस और उसकी संरचना में सुधार की आवश्यकता महसूस करते हैं, ताकि इसे अधिक परीक्षा-उन्मुख और उपयोगी बनाया जा सके।
“सर्वे के निष्कर्ष से पता चलता है कि वर्तमान सिलेबस संरचना बहुत कम परीक्षाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को समेटती है। हालाँकि 27.18% लोग इसे प्रभावी मानते हैं, लेकिन सर्वे का बहुमत (65.56% लोग) इसमें सुधार की वकालत करता है।”
लिंग-आधारित तुलनात्मक विश्लेषण
सर्वेक्षण में कुल 301 महिला तथा 707 पुरुष अभ्यर्थियों ने भाग लिया। RPSC के सिलेबस की संरचना के प्रति महिलाओं और पुरुषों की राय को अलग-अलग रूप में समझने के उद्देश्य से प्राप्त डाटा को लिंग-आधारित वर्गीकरण के साथ नीचे सारणी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
| राय | महिलाओं की प्रतिक्रिया | महिलाओं का प्रतिशत | पुरुषों की प्रतिक्रिया | पुरुषों का प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| प्रत्येक परीक्षा के हिसाब से बहुत अच्छा और केंद्रित होता है | 87 | 28.90% | 187 | 26.44% |
| कुछ हद तक परीक्षा उन्मुख होता है, लेकिन बड़ा हिस्सा ज्यादातर परीक्षाओं के लिए समान रहता है | 126 | 41.86% | 317 | 44.83% |
| पुराना है और परीक्षा की ज़रूरतों से मेल नहीं खाता | 55 | 18.27% | 163 | 23.05% |
| निश्चित नहीं हूँ | 33 | 10.96% | 40 | 13.28% |
पुरुष अभ्यर्थियों की राय (कुल 707)
- पुरुष अभ्यर्थियों में 26.44% ने यह माना कि वर्तमान सिलेबस परीक्षा के हिसाब से उपयोगी है और विभिन्न परीक्षाओं के लिए उपयुक्त है, परंतु लगभग 67.88% अभ्यर्थियों ने सिलेबस को परीक्षाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं माना।
- अनिर्णीत अभ्यर्थियों का अनुपात 13.28% रहा।
महिला अभ्यर्थियों की राय (कुल 301)
- महिला अभ्यर्थियों में केवल 28.90% ने सिलेबस संरचना को सकारात्मक माना, जबकि लगभग 60.13% महिलाओं ने सिलेबस को परीक्षा-उन्मुख न होने की बात कही।
- अनिर्णीत महिलाओं का अनुपात 10.96% रहा।
लिंग-आधारित अंतर (Gender-wise Difference)
- लिंग-आधारित तुलना से स्पष्ट होता है कि महिला अभ्यर्थियों में सकारात्मक राय (विकल्प 1) पुरुषों की तुलना में 2.46% अधिक है, जबकि सिलेबस को नकारात्मक मानने वालों (विकल्प 2 और 3) का प्रतिशत महिलाओं में 7.75% कम पाया गया।
- साथ ही, अनिश्चितता की स्थिति भी महिलाओं में कम (10.96% बनाम 13.28%) रही, जो इस विषय पर पुरुष अभ्यर्थियों में अपेक्षाकृत कम स्पष्टता या जागरूकता की ओर संकेत कर सकती है।

कुल प्रवृत्ति (Overall Trend)
सर्वेक्षण से स्पष्ट होता है कि RPSC का सिलेबस अभ्यर्थियों के बीच मध्यम स्तर पर स्वीकार्य है। अधिकांश अभ्यर्थी इसे न तो पूरी तरह परीक्षा-विशेष के अनुकूल मानते हैं और न ही पूर्णतः अप्रासंगिक। सिलेबस को एक सामान्य, दोहरावपूर्ण और अपेक्षाकृत स्थिर ढाँचा माना जा रहा है, जो व्यापक तैयारी में सहायक है, किंतु विशिष्ट सेवाओं की आवश्यकताओं को पूरी तरह संबोधित नहीं करता।
कुल मिलाकर प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि अभ्यर्थी सिलेबस में व्यापक सुधार नहीं, बल्कि लक्षित और समयानुकूल संशोधन की अपेक्षा रखते हैं, जिससे यह अधिक प्रासंगिक, परीक्षा-उन्मुख और व्यावहारिक बन सके।
निष्कर्ष (डेटा-आधारित)
- प्रस्तुत सर्वेक्षण के आँकड़े यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि RPSC के सिलेबस (पाठ्यक्रम) को लेकर अभ्यर्थियों की धारणा पूर्णतः सकारात्मक नहीं, बल्कि संतुलित और आलोचनात्मक है। महिला और पुरुष—दोनों वर्गों में सबसे अधिक अभ्यर्थियों ने यह राय व्यक्त की है कि सिलेबस कुछ हद तक परीक्षा-उन्मुख है, किंतु उसका बड़ा हिस्सा अधिकांश परीक्षाओं के लिए समान रहता है। यह मत महिलाओं में 41.86% (126 अभ्यर्थी) तथा पुरुषों में 44.83% (317 अभ्यर्थी) के साथ सबसे प्रमुख रूप में उभरकर सामने आया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अभ्यर्थी सिलेबस को उपयोगी तो मानते हैं, लेकिन उसे परीक्षा-विशेष के अनुरूप पर्याप्त रूप से केंद्रित नहीं समझते।
- सकारात्मक दृष्टिकोण की बात करें तो, प्रत्येक परीक्षा के हिसाब से सिलेबस को बहुत अच्छा और केंद्रित मानने वाली राय महिलाओं में 28.90% (87)तथा पुरुषों में 26.44% (187) रही। यह दर्शाता है कि लगभग एक-चौथाई अभ्यर्थी सिलेबस से संतुष्ट हैं, किंतु यह संतुष्टि बहुसंख्यक नहीं है।
- दूसरी ओर, सिलेबस को पुराना और परीक्षा की ज़रूरतों से मेल न खाने वाला मानने वाले अभ्यर्थियों का अनुपात पुरुषों में 23.05% (163) तथा महिलाओं में 18.27% (55) पाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि विशेषकर पुरुष अभ्यर्थियों में सिलेबस की प्रासंगिकता को लेकर अपेक्षाकृत अधिक असंतोष मौजूद है।
- इसके अतिरिक्त, अनिश्चित या स्पष्ट राय न रखने वाले अभ्यर्थियों का अनुपात भी नगण्य नहीं है—महिलाओं में 10.96% (33) तथा पुरुषों में 13.28% (40)। यह स्थिति सिलेबस की जटिलता, अस्पष्ट संरचना या परीक्षा-विशेष दिशा-निर्देशों की कमी की ओर संकेत करती है।
- समग्र रूप से, सर्वेक्षण से यह निष्कर्ष निकलता है कि RPSC का सिलेबस अभ्यर्थियों के बीच मध्यम स्तर की स्वीकार्यता रखता है। इसे न तो पूर्णतः आधुनिक और परीक्षा-विशिष्ट माना जा रहा है और न ही पूरी तरह अप्रासंगिक। अभ्यर्थियों की अपेक्षा यह है कि सिलेबस को अधिक गतिशील, पद-विशेष के अनुरूप और समसामयिक आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ बनाया जाए, ताकि यह केवल सामान्य तैयारी का साधन न रहकर चयन प्रक्रिया की गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करने वाला प्रभावी उपकरण बन सके।
नीतिगत सिफारिशें (Policy Recommendations)
1. परीक्षा-विशेष सिलेबस का स्पष्ट विभाजन
- RPSC को चाहिए कि प्रत्येक परीक्षा/सेवा के लिए सिलेबस को स्पष्ट रूप से अलग-अलग परिभाषित करे, जिससे अभ्यर्थियों में यह भ्रम न रहे कि अधिकांश परीक्षाओं का पाठ्यक्रम समान है।
2. सिलेबस का नियमित और समयबद्ध अद्यतन
- सर्वे के आँकड़े दर्शाते हैं कि एक उल्लेखनीय वर्ग सिलेबस को पुराना मानता है। अतः सिलेबस की नियमित समीक्षा एवं संशोधन हेतु एक स्थायी अकादमिक समिति गठित की जानी चाहिए।
3. विश्लेषणात्मक और अनुप्रयोगात्मक विषयों पर ज़ोर
- पाठ्यक्रम में तथ्यात्मक ज्ञान के साथ-साथ विश्लेषणात्मक सोच, निर्णय-क्षमता और अनुप्रयोगात्मक कौशलों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
4. अभ्यर्थी-फीडबैक आधारित सुधार
5. शोध और डेटा-आधारित नीति निर्माण
- भविष्य में RPSC जैसी संस्थाओं को सर्वेक्षण, डेटा विश्लेषण और अकादमिक शोध को अपनी नीति-निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।
6. विश्वास और पारदर्शिता में वृद्धि
- यदि सिलेबस को अधिक स्पष्ट, अद्यतन और व्यावहारिक बनाया जाता है, तो इससे न केवल अभ्यर्थियों की तैयारी बेहतर होगी, बल्कि चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थागत विश्वास भी सुदृढ़ होगा।
RPSC का सिलेबस वर्तमान में एक मजबूत आधार प्रदान करता है, किंतु नीतिगत हस्तक्षेप और भविष्य-उन्मुख सुधारों के माध्यम से इसे अधिक प्रभावी, प्रासंगिक और अभ्यर्थी-अनुकूल बनाया जा सकता है।




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