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Survey -02: अभ्यर्थियों द्वारा RPSC से संबंधित सामना की जाने वाली समस्याओं का विश्लेषण

CAP Rajasthan के द्वारा RPSC पर किए गए सर्वे का यह भाग–3 है, जो प्रश्न संख्या–05 —“आपको RPSC संस्था से संबंधित किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा है?” — के संबंध में प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर आधारित है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में से एक है, जिसकी कार्यप्रणाली सीधे तौर पर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है। CAP Rajasthan द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण का उद्देश्य अभ्यर्थियों के अनुभवों और चुनौतियों को व्यवस्थित रूप से समझना था।

इस सर्वे में कुल 1008 प्रतिक्रियाएँ प्राप्त हुईं, जिनमें से 985 वैध प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया है। इस प्रश्न की प्रतिक्रिया दर 97.71% रही, जो यह दर्शाती है कि यह विषय अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

नोट: इस सर्वे में कुछ प्रश्न ऐसे थे जिनमें एक से अधिक विकल्प चुनने की अनुमति थी। ऐसे प्रश्नों का विश्लेषण प्रश्न संख्या–05 के अंतर्गत किया गया है। इसी कारण इस विश्लेषण के कुछ भागों में कुल प्रतिशत 100 से अधिक दर्शाया गया है।

डाटा प्रोफाइल एवं प्रमुख निष्कर्ष (Data Profile & Key Findings):

समस्याप्रतिक्रियाएँ (संख्या)उत्तरदाताओं का %
परीक्षा में देरी या बार-बार स्थगन408 41.42%
प्रश्नपत्र लीक होना या पुनः परीक्षा240 24.36%
परिणाम जारी करने में देरी124 12.58%
उत्तरकुंजी (Answer Key) में त्रुटियाँ41 04.16%
आवेदन या परीक्षा केंद्र में तकनीकी दिक्कतें14 01.42%
सिलेबस बहुत बड़ा होना158 16.04%
Chart – 01

ऊपर दी गई सारणी से स्पष्ट होता है कि RPSC से संबंधित समस्याओं में सबसे प्रमुख चुनौती परीक्षा में देरी या बार-बार स्थगन रही है, जिसे 41.42% उत्तरदाताओं ने अपनी सबसे बड़ी चिंता के रूप में बताया। यह स्थिति न केवल अभ्यर्थियों की तैयारी की निरंतरता को प्रभावित करती है, बल्कि उनके भीतर मानसिक दबाव, अनिश्चितता और असुरक्षा की भावना भी उत्पन्न करती है।

लगभग एक-चौथाई उत्तरदाताओं (24.36%) के लिए प्रश्नपत्र लीक होना या पुनः परीक्षा आयोजित होना एक प्रमुख समस्या रही। ऐसी घटनाएँ RPSC की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। इसके परिणामस्वरूप अभ्यर्थियों में असंतोष और अविश्वास की भावना पनपने लगती है।

इसके अतिरिक्त, सिलेबस का अत्यधिक विस्तृत होना (16.04%) भी एक उल्लेखनीय समस्या के रूप में सामने आया। अभ्यर्थी आयोग द्वारा निर्धारित सिलेबस को निर्धारित समय में पूरा नहीं कर पाते, जिसका सीधा प्रभाव उनके रिवीजन, आत्मविश्वास और अंतिम परिणाम पर पड़ता है।

लगभग 12.58% उत्तरदाताओं ने परिणाम जारी करने में देरी को अपनी प्रमुख समस्या बताया। समय पर परिणाम न आने से अभ्यर्थियों की करिअर योजना प्रभावित होती है और उनकी तैयारी की दिशा अस्थिर हो जाती है। वहीं, उत्तरकुंजी में त्रुटियाँ (4.16%) और तकनीकी दिक्कतें (1.42%) अपेक्षाकृत कम प्रतिशत में सामने आईं, लेकिन जिन परीक्षाओं में ये समस्याएँ उत्पन्न हुईं, वहाँ अभ्यर्थियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ा।

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तुलनात्मक विश्लेषण (Cross-Tab Analysis)

यहाँ अभ्यर्थियों द्वारा RPSC से संबंधित समस्याओं का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

1. परीक्षा में देरी या बार-बार स्थगन

  • लिंग-आधारित अंतर: इस समस्या को लेकर पुरुष अभ्यर्थियों का प्रतिशत 72.05% तथा महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत 27.94% रहा।
  • परीक्षा-वार स्थिति: यह समस्या विशेष रूप से RAS, कॉलेज लेक्चरर और स्कूल शिक्षक परीक्षाओं में अधिक देखने को मिली, जबकि अन्य परीक्षाओं में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा।
  • करिअर पर प्रभाव: परीक्षा में देरी या बार-बार स्थगन जैसी घटनाओं से अभ्यर्थियों में परीक्षा को लेकर तनाव और चिंता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
  • विश्लेषण: सर्वे डाटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि पुरुष अभ्यर्थियों ने इस समस्या को अपेक्षाकृत अधिक गंभीरता से महसूस किया। संभवतः इसका कारण उनकी करिअर योजना पर पड़ने वाला प्रत्यक्ष प्रभाव है। साथ ही, यह स्थिति उनकी तैयारी की निरंतरता और मानसिक संतुलन को भी प्रभावित करती है।

2. प्रश्नपत्र लीक होना या पुनः परीक्षा

  • लिंग-आधारित अंतर:  इस समस्या को लेकर पुरुष अभ्यर्थियों का प्रतिशत 75% तथा महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत 25% रहा।
  • परीक्षा-वार स्थिति: यह समस्या विशेष रूप से RAS, कॉलेज लेक्चरर तथा स्कूल शिक्षक परीक्षाओं में उल्लेखनीय रूप से सामने आई।
  • करिअर पर प्रभाव: प्रश्नपत्र लीक होना या पुनः परीक्षा आयोजित होने से अभ्यर्थियों में तैयारी करने की प्रेरणा कम हो जाती है तथा भविष्य को लेकर उनकी चिंता बढ़ जाती है। कई अभ्यर्थियों ने इन कारणों से RPSC परीक्षाओं की तैयारी भी छोड़ दी।
  • विश्लेषण: प्रश्नपत्र लीक होना परीक्षा की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सीधा आघात करता है। इस समस्या को पुरुष अभ्यर्थियों द्वारा अधिक रिपोर्ट किया गया, जो इस बात का संकेत है कि वे परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर अधिक चिंतित हैं।

3. परिणाम जारी करने में देरी

  • लिंग-आधारित अंतर: इस समस्या में पुरुष अभ्यर्थियों का प्रतिशत 77.41% तथा महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत 22.58% रहा।
  • परीक्षा-वार स्थिति: परिणाम जारी करने में देरी की समस्या RAS परीक्षा में सर्वाधिक देखने को मिली। इसके अतिरिक्त, कॉलेज लेक्चरर और स्कूल शिक्षक परीक्षाओं में भी यह समस्या प्रभावी रूप से सामने आई।
  • करिअर पर प्रभाव: आयोजित परीक्षाओं के परिणाम समय पर जारी न होने से कई अभ्यर्थी अपनी करिअर योजना को लेकर अधिक तनावग्रस्त हो जाते हैं।
  • विश्लेषण: अधिकांश अभ्यर्थी परिणामों के आधार पर आगे की तैयारी और नौकरी से संबंधित निर्णय लेते हैं। परिणामों में देरी से उनकी करिअर योजना और मानसिक स्थिरता प्रभावित होती है। इस समस्या को भी पुरुष अभ्यर्थियों ने अधिक गंभीरता से महसूस किया।

4. उत्तरकुंजी (Answer Key) में त्रुटियाँ

  • लिंग-आधारित अंतर: इस समस्या के संदर्भ में पुरुष अभ्यर्थियों का प्रतिशत 77.41% तथा महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत 22.58% रहा।
  • परीक्षा-वार स्थिति: कॉलेज लेक्चरर और स्कूल शिक्षक परीक्षाओं में उत्तरकुंजी से संबंधित त्रुटियों को लेकर अभ्यर्थियों में अधिक असंतोष देखा गया।
  • करिअर पर प्रभाव: त्रुटिपूर्ण उत्तरकुंजी जारी होने से अभ्यर्थियों में तनाव और असमंजस की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • विश्लेषण: हालाँकि यह समस्या अपेक्षाकृत कम प्रतिशत में सामने आई, लेकिन जिन परीक्षाओं में यह हुई, वहाँ इसका प्रभाव काफी गहरा रहा। उत्तरकुंजी में त्रुटियाँ अभ्यर्थियों के परीक्षा प्रणाली पर विश्वास को कमजोर करती हैं।
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5. परीक्षा केंद्र पर तकनीकी दिक्कतें

  • लिंग-आधारित अंतर: इस समस्या के संदर्भ में महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत 57.14% तथा पुरुष अभ्यर्थियों का प्रतिशत 42.85% रहा।
  • परीक्षा-वार स्थिति: तकनीकी दिक्कतों की समस्या कॉलेज लेक्चरर परीक्षाओं में सबसे अधिक दर्ज की गई। सर्वे के निष्कर्षों से यह भी स्पष्ट होता है कि अन्य परीक्षाओं में यह समस्या अपेक्षाकृत कम रही।
  • करिअर पर प्रभाव: आवेदन प्रक्रिया अथवा परीक्षा केंद्र पर उत्पन्न तकनीकी दिक्कतें अभ्यर्थियों में तनाव और चिंता को बढ़ाती हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावितहोता है।
  • विश्लेषण: सर्वे डाटा के अनुसार तकनीकी दिक्कतें महिला अभ्यर्थियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण रहीं। यह संकेत करता है कि तकनीकी सुविधाओं की कमी या प्रक्रियाओं की जटिलता महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है।

6. सिलेबस का अत्यधिक विस्तृत होना

  • लिंग-आधारित अंतर: इस समस्या में महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत 55.06% तथा पुरुष अभ्यर्थियों का प्रतिशत 44.93% रहा।
  • परीक्षा-वार स्थिति: सिलेबस के अत्यधिक विस्तार की समस्या कॉलेज लेक्चरर परीक्षाओं में सबसे अधिक देखने को मिली। इसके अतिरिक्त, स्कूल शिक्षक और RAS परीक्षाओं में भी यह समस्या उल्लेखनीय रूप से सामने आई।
  • करिअर पर प्रभाव: सिलेबस के अत्यधिक विस्तृत होने से अभ्यर्थियों में तनाव बढ़ जाता है, जिससे उनकी तैयारी की प्रेरणा कम हो जाती है और तैयारी की प्रक्रिया अधिक चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
  • विश्लेषण: सर्वे डाटा के क्रॉस-विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि अधिकांश उत्तरदाताओं का मानना है कि सिलेबस कुछ हद तक परीक्षा-उन्मुख होता है, जबकि उसका एक बड़ा हिस्सा विभिन्न परीक्षाओं में समान रहता है। लगभग एक-चौथाई उत्तरदाताओं के अनुसार सिलेबस प्रत्येक परीक्षा के अनुरूप अच्छी तरह केंद्रित होता है।
  • हालाँकि, सिलेबस का अत्यधिक विस्तार अभ्यर्थियों पर मानसिक दबाव डालता है और तैयारी को कठिन बना देता है। इस संदर्भ में महिला अभ्यर्थियों ने सिलेबस को अधिक चुनौतीपूर्ण माना।

नोट: ये सभी आँकड़े CAP Rajasthan द्वारा स्वतंत्र रूप से कराए गए सर्वेक्षण से प्राप्त किए गए हैं। किसी भी प्रकार की आपत्ति, सुझाव या स्पष्टीकरण के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

Author

  • My name is  Radhika Jangir. I am a Research Fellow in Political Science at Banasthali Vidyapith, Rajasthan.

    My research interest centres around Indian Administration and e-Governance, with a keen interest in policy implementation strategies.

    Furthermore, I seek to contribute to academic discourse and enhance public understanding by analysing how institutional frameworks translate into impactful changes in society.

     

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One response

  1.  Avatar
    Anonymous

    Jab mujhe

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