CAP Rajasthan

Survey -02: RPSC परीक्षाओं में ड्रेस कोड की प्रभावशीलता पर राय

आरपीएससी (RPSC) द्वारा परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने तथा नकल जैसी अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से परीक्षा के दौरान एक सख्त ड्रेस कोड लागू किया जाता है।

CAP राजस्थान द्वारा आरपीएससी की कार्यप्रणाली पर आयोजित सर्वेक्षण में, प्रश्न संख्या–7 के अंतर्गत इस ड्रेस कोड की प्रभावशीलता पर अभ्यर्थियों की राय प्राप्त की गई। इस प्रश्न के अंतर्गत अभ्यर्थियों को पाँच विकल्प प्रदान किए गए थे। प्रस्तुत रिपोर्ट में सर्वेक्षण से प्राप्त डाटा के आधार पर प्रतिशतगत वितरण, लिंग-आधारित तुलना, विश्लेषण, निष्कर्ष एवं सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

प्रश्न संख्या–7

क्या आपको लगता है कि आरपीएससी द्वारा लागू किया गया सख्त ड्रेस कोड नकल या अन्य अनुचित तरीकों को रोकने में मदद करता है?

अभ्यर्थियों को निम्नलिखित पाँच विकल्प दिए गए थे:

  1. हाँ, यह नकल रोकने में प्रभावी है।
  2. कुछ हद तक मदद करता है, लेकिन बहुत अधिक नहीं।
  3. नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
  4. यह अधिक असुविधा पैदा करता है, लेकिन परीक्षा की ईमानदारी नहीं बढ़ाता।
  5. निश्चित नहीं हूँ / कोई राय नहीं।

डेटा प्रोफाइल तथा वर्णनात्मक विश्लेषण

  • सर्वेक्षण में कुल 1008 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। प्रश्न संख्या–7 के अंतर्गत दिए गए पाँच विकल्पों पर अभ्यर्थियों की प्रतिक्रियाएँ तथा उनका प्रतिशतगत वितरण नीचे तालिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
रायप्रतिक्रियाप्रतिशत
हाँ, यह नकल रोकने में प्रभावी है।22522.32
कुछ हद तक मदद करता है, लेकिन बहुत अधिक नहीं।37637.30
नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।18518.35
यह अधिक असुविधा पैदा करता है, लेकिन परीक्षा की ईमानदारी नहीं बढ़ाता।20320.13
निश्चित नहीं हूँ / कोई राय नहीं।191.88
  • सर्वेक्षण में सर्वाधिक छात्रों (37.3%) ने यह माना कि ड्रेस कोड कुछ हद तक मददगार है, जबकि 22.3% छात्रों ने इसे पूर्ण रूप से प्रभावी बताया। वहीं, लगभग 20.1% छात्रों ने ड्रेस कोड से असुविधा होने की बात कही, और 18.3% छात्रों का मानना था कि इससे कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता। अनिर्णीत रहने वाले छात्रों का अनुपात मात्र 1.9% रहा।

विश्लेषण

सकारात्मक राय का प्रभुत्व:

  • कुल 59.6% छात्र (विकल्प 1 और 2) ड्रेस कोड को नकल रोकने में कम या अधिक स्तर पर प्रभावी मानते हैं। यह संकेत देता है कि अधिकांश अभ्यर्थी ड्रेस कोड की उपयोगिता को स्वीकार करते हैं और इसे परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने का एक सहायक उपाय समझते हैं।

नकारात्मक / तटस्थ राय:

  • वहीं 38.5% छात्र (विकल्प 3 और 4) या तो इसे अप्रभावी मानते हैं या इसे अधिक असुविधाजनक बताते हैं। यह दर्शाता है कि ड्रेस कोड के क्रियान्वयन, संचार और व्यावहारिक पहलुओं में सुधार की आवश्यकता है, ताकि परीक्षार्थियों की असुविधा कम हो और इसकी स्वीकार्यता बढ़े।

सर्वे के निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि ड्रेस कोड की प्रभावशीलता मध्यम स्तर की है। अधिकांश अभ्यर्थी इसे नकल रोकने में सहायक मानते हैं, किंतु असुविधा एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आई है।

लिंग आधारित तुलनात्मक विश्लेषण

  • सर्वेक्षण में कुल 301 महिला तथा 707 पुरुष अभ्यर्थियों ने भाग लिया। आरपीएससी (RPSC) के ड्रेस कोड के प्रति महिलाओं और पुरुषों की राय को अलग-अलग रूप में समझने के उद्देश्य से प्राप्त डाटा को लिंग-आधारित वर्गीकरण के साथ सारणी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
रायमहिलाओं की प्रतिक्रियामहिलाओं की प्रतिक्रिया (प्रतिशत में)पुरुषों की प्रतिक्रियापुरुषों की प्रतिक्रिया, प्रतिशत में
हाँ, यह नकल रोकने में प्रभावी है।7023.2515521.92
कुछ हद तक मदद करता है, लेकिन बहुत अधिक नहीं।11337.5426337.19
नहीं, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।4514.9514019.80
यह अधिक असुविधा पैदा करता है, लेकिन परीक्षा की ईमानदारी नहीं बढ़ाता।6220.5914119.94
निश्चित नहीं हूँ / कोई राय नहीं।113.6581.1

पुरुष अभ्यर्थियों की राय (कुल 707)

  • पुरुष अभ्यर्थियों में 37.2% ने यह माना कि ड्रेस कोड कुछ हद तक मददगार है, जबकि 21.9% ने इसे प्रभावी बताया। लगभग 19.9% अभ्यर्थियों ने ड्रेस कोड कोअसुविधाजनक माना, और 19.8% का मत था कि इससे कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता। अनिर्णीत अभ्यर्थियों का अनुपात मात्र 1.1% रहा।

महिला अभ्यर्थियों की राय (कुल 301)

  • महिला अभ्यर्थियों में 37.5% ने ड्रेस कोड को आंशिक रूप से मददगार माना, जबकि 23.3% ने इसे प्रभावी बताया, जो पुरुष अभ्यर्थियों की तुलना में थोड़ा अधिक है। लगभग20.6% महिलाओं ने ड्रेस कोड से असुविधा होने की बात कही, जबकि केवल 15.0% का मानना था कि इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। अनिर्णीत महिलाओं का अनुपात3.7% रहा।

लिंग-आधारित अंतर (Gender-wise Difference)

  • लिंग-आधारित तुलना से स्पष्ट होता है कि महिला अभ्यर्थियों में सकारात्मक राय (विकल्प 1) पुरुषों की तुलना में 1.4% अधिक है, जबकि “कोई फर्क नहीं पड़ता” (विकल्प 3) की राय महिलाओं में 4.8% कम पाई गई। यह संकेत करता है कि यद्यपि ड्रेस कोड की सख्ती महिलाओं के लिए अधिक प्रासंगिक हो सकती है, फिर भी वे इसे अपेक्षाकृत अधिक स्वीकार्य मानती हैं।
  • साथ ही, अनिर्णय की स्थिति महिलाओं में अधिक (3.7% बनाम 1.1%) पाई गई, जो इस विषय पर स्पष्ट जानकारी या जागरूकता की कमी की ओर संकेत कर सकती है।
दो पाई चार्ट, एक में विभिन्न विकल्पों के लिए प्रतिशत शेयर दिखाए गए हैं, जो आरपीएससी के ड्रेस कोड के प्रभाव पर अभ्यर्थियों की राय को दर्शाते हैं।
 (चित्र:1 महिलाओं की राय) (चित्र:2 पुरुषों की राय)

कुल प्रवृत्ति (Overall Trend)

सर्वेक्षण के निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि ड्रेस कोड की लोकप्रियता मध्यम स्तर की है। अधिकांश अभ्यर्थी इसे नकल रोकने में सहायक मानते हैं, किंतु असुविधा एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आई है। यह संकेत करता है कि ड्रेस कोड की मूल भावना को बनाए रखते हुए इसके डिज़ाइन और क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

सर्वेक्षण से यह स्पष्ट होता है कि आरपीएससी द्वारा लागू किया गया सख्त ड्रेस कोड अभ्यर्थियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहा है। लगभग 60% अभ्यर्थी इसे नकल नियंत्रण के लिए उपयोगी मानते हैं, जबकि लगभग 40% अभ्यर्थियों ने इसे असुविधाजनक या अप्रभावी बताया है।

लिंग-आधारित अंतर न्यूनतम पाया गया है, हालांकि महिला अभ्यर्थियों में थोड़ी अधिक सकारात्मकता देखने को मिलती है। समग्र रूप से, ड्रेस कोड परीक्षा की अखंडता और निष्पक्षता को मजबूत करने में योगदान देता है, लेकिन अभ्यर्थियों की सुविधा और व्यावहारिक अनुभव पर पर्याप्त ध्यान न दिए जाने से इसकी स्वीकार्यता प्रभावित हो रही है।

यह स्थिति नीति-निर्माताओं के लिए ड्रेस कोड को संतुलित, व्यावहारिक और अभ्यर्थी-अनुकूल बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है।

नोट: ये सभी आँकड़े CAP Rajasthan द्वारा स्वतंत्र रूप से कराए गए सर्वेक्षण से प्राप्त किए गए हैं। किसी भी प्रकार की आपत्ति, सुझाव या स्पष्टीकरण के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

Author

  • My name is Pratibha Kumari, and I am a Research Scholar in the Department of Political Science at Pandit Deendayal Upadhyaya Shekhawati University, Sikar. My doctoral research focuses on the theme: “Citizen Participation and Good Governance: A Study of the Role of the RTI Act with Special Reference to Rajasthan.” This study seeks to critically examine how the Right to Information (RTI) Act has empowered citizens and enhanced transparency, accountability, and participatory governance in the context of Rajasthan.


     

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3 responses

  1.  Avatar
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    Great 👍

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    Good job 👍

  3.  Avatar
    Anonymous

    Nice job 👍👏

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