CAP Rajasthan

Survey -02: RPSC परीक्षाओं में हिंदी–अंग्रेज़ी प्रश्नों की अनुवाद गुणवत्ता पर अभ्यर्थियों की राय

CAP Rajasthan ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता और निष्पक्षता का मूल्यांकन करने के लिए एक सर्वेक्षण आयोजित किया। इस सर्वे में प्रतिभागियों से परीक्षा‑प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर सवाल पूछे गये, जिनसे संस्था की विश्वसनीयता और अभ्यर्थियों के अनुभवों को समझना था। 

द्विभाषी (English to Hindi) प्रश्न‑पत्रों में अनुवाद की त्रुटियाँ अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और अवसर समानता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। अनुवाद की गुणवत्ता का विषय न्यायिक प्रक्रिया, अनुचित लाभ, और प्रशासनिक दक्षता से प्रत्यक्षतः जुड़ा हुआ है। सर्वे का प्रश्न 8 इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखता है और इसलिए इसका विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है। 

प्रश्न का वैचारिक विवेचन (Conceptual Background)

प्रश्न 8 : “क्या RPSC परीक्षा में हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में प्रश्न बिना अनुवाद की गलती के दिए जाते हैं?”

  1. A हाँ, अनुवाद सही और निष्पक्ष रहता है।
  2. B नहीं, अक्सर अनुवाद में गलती होती है।
  3. C निश्चित नहीं हूँ।

इस प्रश्न के माध्यम से हमने अनुवाद की गुणवत्ता के माध्यम से परीक्षा की भाषाई निष्पक्षता को मापने का प्रयास किया है। यह प्रश्न हिंदी‑माध्यम और अंग्रेज़ी‑माध्यम के अभ्यर्थियों के बीच अवसर‑समानता, संस्थागत विश्वसनीयता और सांविधानिक भाषा‑न्याय (Article 14 एवं 16) से जुड़ा है। अनुवाद त्रुटियाँ परीक्षा‑प्रक्रिया में hidden biases या neglect को दर्शा सकती हैं; इस तरह यह प्रश्न अभ्यर्थियों की परीक्षा‑अभ्यास की धारणा और आयोग के प्रति विश्वास को समझने का मार्ग है।

डेटा प्रोफाइल एवं वर्णनात्मक विश्लेषण

सर्वे में कुल 1008 उत्तरदाताओं ने हिस्सा लिया। प्रश्न 8 के उत्तर तीन विकल्पों में वितरित थे। उनकी संख्या और प्रतिशत नीचे दी गयी तालिका में प्रस्तुत हैं:

विकल्पसंख्या (Number of Responses)प्रतिशत (%)
अनुवाद सही45945.54
अनुवाद गलत42842.46
निश्चित नहीं12112.0
कुल 1008100

ऊपर की तालिका से स्पष्ट है कि लगभग 45.5 % अभ्यर्थियों ने अनुवाद को “सही और निष्पक्ष” माना, जबकि 42.5 % ने माना कि अनुवाद में अक्सर गलती होती है। 12 % प्रतिभागी अनिश्चित थे। इस वितरण का दृश्य विवरण नीचे के चित्र में दिया है:

एक चार्ट जिसमें RPSC परीक्षा में हिंदी और английी भाषाओं में प्रश्नों के अनुवाद की गुणवत्ता पर अभ्यर्थियों के उत्तर दर्शाए गए हैं। चार्ट में तीन विकल्प हैं: 'हाँ, अनुवाद सही और निष्पक्ष रहता है' (45.5%), 'नहीं, अक्सर अनुवाद में गलती होती है' (42.5%), और 'निश्चित नहीं हूँ' (12%).

प्रमुख निष्कर्ष (Key Findings)

विश्लेषण बताता है कि अनुवाद की गुणवत्ता पर अभ्यर्थियों की राय लगभग विभाजित है। यद्यपि थोड़ा अधिक प्रतिशत (45.5 %) अनुवाद को सही मानता है, मगर 42.5 % प्रतिभागी अनुवाद त्रुटियों की शिकायत करते हैं। “निश्चित नहीं” उत्तर (12 %) दर्शाता है कि कुछ अभ्यर्थी अनुभव के अभाव या तटस्थता के कारण अनिश्चित हैं। इन परिणामों से यह संकेत मिलता है कि अनुवाद संबंधी समस्या अपवाद के बजाय व्यापक और प्रणालीगत है। ऐसी विविध राय परीक्षा‑प्रक्रिया के प्रति मिश्रित अनुभव और आयोग की भाषा‑संवेदनशीलता पर प्रश्न उठाती है।

तुलनात्मक विश्लेषण (Cross‑Tab Analysis)

नीचे दी गयी तुलना से स्पष्ट होता है कि अनुवाद‑गुणवत्ता की धारणा विभिन्न जनसांख्यिकीय और अनुभवजन्य समूहों के अनुसार बदलती है।

लिंग के अनुसार तुलना

विकल्प पुरुषमहिला
अनुवाद गलत45.6934.88
निश्चित नहीं10.3315.95
अनुवाद सही43.9949.17
स्त्री और पुरुष के बीच RPSC परीक्षा में द्विभाषी प्रश्नों के अनुवाद की गुणवत्ता पर राय को दर्शाने वाला चार्ट।

पुरुषों में 45.7 % ने अनुवाद को त्रुटिपूर्ण बताया, जबकि महिलाओं में यह प्रतिशत 34.9 % है। महिलाएँ अपेक्षाकृत अधिक (49.2 %) अनुवाद को सही मानती हैं। पुरुषों में अनिश्चितता का स्तर कम (10.3 %) है, जबकि महिलाओं में 15.9 % अनिश्चित हैं। इससे संकेत मिलता है कि महिला प्रतिभागियों का अनुवाद के प्रति अनुभव तुलनात्मक रूप से सकारात्मक है या वे त्रुटियों को कम महसूस करती हैं।

व्याख्या एवं निहितार्थ (Interpretation & Implications)

सर्वे के परिणामों से स्पष्ट है कि RPSC के द्विभाषी प्रश्न‑पत्रों में अनुवाद‑गुणवत्ता एक विवादास्पद मुद्दा है। लगभग समान अनुपात में उत्तरदाता अनुवाद को ‘सही’ और ‘त्रुटिपूर्ण’ मानते हैं, जिससे इस समस्या के व्यापक और प्रणालीगत होने का संकेत मिलता है। 

इन निष्कर्षों के अनेक निहितार्थ हैं। अनुवाद‑त्रुटियाँ हिंदी‑माध्यम अभ्यर्थियों के अवसरों को क्षति पहुँचा सकती हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षा की merit‑based nature प्रभावित होती है। परीक्षाओं की विश्वसनीयता में गिरावट शासन‑प्रणाली पर व्यापक अविश्वास पैदा कर सकती है। इस प्रकार, अनुवाद‑गुणवत्ता में सुधार केवल भाषाई न्याय नहीं बल्कि सामान्य प्रशासनिक भरोसा बहाल करने का भी माध्यम है।

नोट – ये सभी आंकड़े CAP Rajasthan द्वारा स्वतंत्र रूप से कराये गए सर्वे से प्रदत्त है। किसी भी प्रकार की आपत्ति के लिए आप हमें लिख सकते है।

Author

  • My name is Murli Manohar Dadhich. I am doing a Ph.D. at Mohanlal Sukhadia University, Udaipur. I have completed my M.A. and M.Phil. from the University of Rajasthan. My area of interest is Ancient Indian History.

    My doctoral research is titled “Various Dimensions of Femininity in the Mantras of Rigvedic Rishikas”, where I explore the spiritual and cultural significance of feminine voices in the Rigveda.

     


     

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